महर्षि वेदव्यास ने अठारह पुराणों का संकलन किया हैं. इन में से तीन पुराण (1) श्रीमद्भागवत् महापुराण, (2) विष्णुपुराण और (3) गरुड़पुराण को कलिकाल में महत्त्वपूर्ण माना गया है. इन तीनों पुराणों में भी गरुड़पुराण का महत्त्व अधिक है. महर्षि कश्यप के पुत्र पक्षीराज गरुड़ को भगवान विष्णु का वाहन कहा गया है.
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य के कर्मो का फल मनुष्य को जीवन में तो मिलता है. परन्तु मनुष्य के मृत्यु के बाद भी कर्मो का फल मिलता है. इसलिए कर्मो के ज्ञान को प्राप्त करने के लिए हिन्दू धर्म में किसी मनुष्य के मृत्यु के बाद मृतक को गरुड़ पुराण का श्रवण कराने से मृतक को जन्म-मृत्यु से जुड़े सभी सत्य का ज्ञान जान सकता है.
गरुड़ पुराण में 19,000 श्लोक है. परन्तु वर्तमान समय में पाण्डुलिपियों में कुल 8,000 श्लोक ही उपलब्ध हैं. इस पुराण को पूर्वखण्ड और उत्तरखण्ड दो भागो में विभाजित किया गया है.
पूर्वखण्डमें कुल 229 अध्याय हैं. उत्तरखण्ड में अध्यायों की संख्या 34 से लेकर 49 तक मिलती है. पूर्वखण्ड को आचार खण्ड भी कहते हैं. उत्तरखण्ड को प्रेतखण्ड या ‘प्रेतकल्प’ भी कहा जाता है. गरुड़ पुराण की 90 प्रतिशत सामग्री पूर्वखण्ड में है, और सिर्फ 10 प्रतिशत सामग्री उत्तरखण्ड में है.
गरुड़ पुराण के पूर्वखण्ड में विविध विषयों का समावेश किया गया है. इसमें जीव और जीवन से सम्बन्धित कथाऐं हैं. प्रेतखण्ड में मुख्य मनुष्य के मृत्यु बाद जीव की गति और उससे जुड़े हुए कर्मो से सम्बन्धित कथाऐं है. गरुड़ पुराण वैसा नहीं हे, जैसा पुराण के लिए भारतीय साहित्य में कहा गया है. इस पुराण में वर्णित कथाऐ भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को सुनाई थी. फिर गरुड़जी ने महर्षि कश्यप को सुनाई थी.
गरुड़ पुराण कथा :
भगवान श्री हरी विष्णु का वाहन पक्षीराज गरुड़ को कहा जाता हैं. एक बार भगवान विष्णु से पक्षीराज गरुड़ ने प्रश्न पूछा की मृत्यु के बाद प्राणियों की स्थिति, जीव की यमलोक-यात्रा विभिन्न कर्मों से प्राप्त होने वाले नरकों, योनियों तथा पापियों की दुर्गति से संबंधित गूढ़ एवं रहस्य क्या है.
गरुड़जी की जिज्ञासा शान्त करने लिए भगवान विष्णु ने उन्हें जो ज्ञानमय उपदेश दिया था, यह ज्ञानमय उपदेश को गरुड़ पुराण कहते है. गरुड़जी के प्रश्न पूछने पर ही स्वयं भगवान विष्णु के मुख से मृत्यु के उपरान्त के गूढ़रहस्य और परम कल्याणकारी वचन प्रकट हुए. भगवान श्री हरी विष्णु के निर्धारित यह पुराण प्रमुख रूप से वैष्णव पुराण है.
गरुड़ पुराण ज्ञान ब्रह्माजी ने महर्षि वेदव्यास को सुनाया था. तत्पश्चात् महर्षि वेदव्यास ने अपने शिष्य महर्षि सूतजी को तथा महर्षि सूतजी ने नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषि-मुनियों को प्रदान किया था.
हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में तीन जन्म से पूर्व, चार जीवनकाल में तथा एक संस्कार मृत्यु के उपरान्त किया जाने वाला अन्तिम अर्थात् अन्त्येष्टि कर्म है, जिस का सम्बन्ध दाहसंस्कार व अन्य अनुष्ठानों से है.
‘मत्स्य पुराण’ के अनुसार मृत्यु से बारह दिनों तक मृतक की आत्मा अपने आवास व सगे सम्बन्धियोंके आस-पास ही रहती है. मृतक की आत्मा अन्त्येष्टि कर्म का संचालन कर रहे पुरोहित के शरीर में भी देवरूप में प्रवेश करती है.
शास्त्रों के अनुसार मृतक की आत्मा गरुड़पुराण की कथा को सुनती है जिस से कि उसे मुक्ति मिल. ‘पितृमेधसूत्र‘ के अनुसार जिस प्रकार मनुष्य को जीवन में संस्कार के निर्वहन से जय मिलती है, उसी प्रकार मरणोपरान्त किए जाने वाले अन्त्येष्टि संस्कार के निर्वहन से मृतक को स्वर्ग प्राप्त होता है.
एक अन्य गरुड़ पुराण की कथा के अनुसार, राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने काट लिया था और रास्ते में उन्हें कश्यप ऋषि मिले. तक्षक नाग ने अपना भेष बदलकर ब्राह्मण वेशधारी ऋषि से पूछा कि वे इतने अधीरता से कहां जा रहे हैं? ऋषि ने बताया कि तक्षक नाग महाराज परीक्षित को कुचलने जा रहे हैं और उनके जहर के प्रभाव को दूर करके उन्हें फिर से जीवन देंगे.
यह सुनकर तक्षक ने अपना परिचय दिया और वापस लौटने को कहा गया. तक्षक ने कश्यप जी से कहा कि मेरे विष के प्रभाव से आज तक कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बच पाया है. तब कश्यप ने कहा कि वह अपने मंत्रों की शक्ति से राजा परीक्षित के विषैले प्रभाव को दूर कर देंगे.
इसके बाद तक्षक ने मुनि से कहा कि यदि ऐसी बात है तो तुम्हें इस वृक्ष को हरा-भरा कर सकते हैं. जब तक्षक ने वृक्ष को जलाकर भस्म कर दिया तो कश्यप ने वृक्ष की राख पर अपना मंत्र जलाया और देखते ही देखते उस राख में से नई कोंपलें फूट पड़ीं और देखते ही देखते वृक्ष फिर से हरा-भरा हो गया.
ऋषि कश्यप के इस चमत्कार से आश्चर्यचकित तक्षक ने पूछा कि वह किस कारण से राजा का भला करना चाहता है? तब साधु ने कहा कि उसे वहां से बड़ी मात्रा में धन मिलेगा. तक्षक ने एक उपाय निकाला और उसे उसकी आशा से अधिक धन देकर वापस भेज दिया. गरुड़ पुराण के अनुसार, गरुड़ पुराण सुनने के बाद कश्यप ऋषि का यह प्रभाव और शक्ति बढ़ गई.
कर्मों के आधार पर अगले जन्म में व्यक्ति किसी रूप में जन्म लेता है. आइए जानते है, गुरुड पुराण क्या कहता है.
कैसे तय होता है अगला जन्म:
महिलाओं का शोषण करने वाला :
जो लोग महिलाओं का शोषण करते या कराते हैं वो अगले जन्म में भयानक रोगों से पीड़ित होते है. वहीं अप्राकृतिक रूप से संबंध बनाने वाला अगले जन्म में नपुंसक, गुरु पत्नी के साथ दुराचार करने वाला कुष्ठ रोगी होता है.
धोखा देने वाला :
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो मनुष्य छल, कपट और धोखा देते हैं वो अगले जीवन में उल्लू बनते हैं. वहीं झूठी गवाही देने वाला दूसरे जन्म में अंधा पैदा होता है.
हिंसा करने वाला :
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति हिंसा करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जैसे लूटपाट, जानवरों को सताना या शिकार खेलने वाले अगले जन्म में किसी कसाई हत्थे चढ़ने वाला बकरा बनते हैं.
परिवार को प्रताड़ित करने वाला :
माता-पिता या भाई-बहन को प्रताड़ित करने वाले मनुष्य को अगला जन्म तो मिलता है लेकिन वह धरती पर नहीं आ पाते क्योंकि उनकी मृत्यु गर्भ में ही हो जाती है.
गुरु का अपमान करने वाला :
गुरु का अपमान यानी भगवान का अपमान. ऐसा करना नरक के द्वार खोलने जैसा है. गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गुरु से कुतर्क करनेवाला शिष्य अगले जन्म में जल रहित वन में ब्रह्मराक्षस बनता है.
पुरुष का महिलाओं जैसा व्यवहार :
यदि कोई पुरुष महिलाओं वाला आचरण करता है स्वभाव में महिलाओं वाली आदतें ले आता है तो ऐसे पुरुषों को अगले जन्म में स्त्री का रुप मिलता है.
मृत्य के समय भगवान का नाम :
अगर कोई मृत्यु के समय भगवान का नाम लेता है तो वो मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है. इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि मरते समय राम का नाम लेना चाहिए.
हत्या करने वाला :
स्त्री की हत्या, गर्भपात करने या कराने वाला भिल्ल रोगी, गाय की हत्या करने वाला मूर्ख और कुबड़ा, ये दोनों नरक की यातनाएं भोगने के बाद अगले जन्म चांडाल योनी में ही पैदा होते हैं.
गरुड़ पुराण का एक श्लोक :
विष्णुरेकादशी गंगा तुलसीविप्रधेवन:। असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी।।
भगवान विष्णु :
गरुड़ पुराण के अनुसार भगवान विष्णु अपने भक्तों के सभी दुखों का नाश करते हैं और जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं. इसलिए प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. इससे हर कार्य में सफलता मिलती है.
गाय :
हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र और पूजनीय पशु माना गया है. मान्यता है कि गाय के शरीर अलग-अलग भागों में देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए गाय को माता के समान दर्जा प्राप्त है और देवतुल्य मानकर इसकी पूजाकी जाती है. प्रतिदिन गौ पूजन करने से और गाय की सेवा करने से समस्त पाप कर्मों से भी मुक्ति मिलती है.
गंगा नदी :
हिंदू धर्म में गंगा नदी को सभी नदियों में श्रेष्ठ माना जाता है. गंगा में स्नान करने और पूजा करने से हर काम में सफलता मिलती है.
तुलसी :
भगवान विष्णु को तुलसी अतिप्रिय है. जिस घर पर प्रतिदिन तुलसी पूजन किया जाता है वहां मां लक्ष्मी का वास होता है और भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है.
पंडित या ज्ञानी :
पंडित, पुरोहित या ज्ञानी को हमेशा सम्मान दें. जो लोग इनका उपहास करते हैं वह जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते. अतः हमेशा इनका सम्मान करें और इनके द्वारा बताई बातों का पालन करें.
एकादशी व्रत :
हिंदू धर्म में सभी व्रतों में एकादशी व्रत को श्रेष्ठ माना गया है. मान्यता है कि, जो व्यक्ति सभी एकादशी व्रतों को श्रद्धा औरनि के साथ व्रत रखता है, उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही एकादशी नियमों का पालन करने वालों को भी भगवान का आशीर्वाद मिलता है.