नेवला ( MONGOOSE ) और सांप की लड़ाई के बारेमें आप लिगोने अवश्य सुना होगा कि, नेवला सांप को मार देता है और बादमे वनस्पति जड़ीबूटी के सहारे सांप को वापस जिंदा कर देता है.
आज नेवला के बारेमें कुछ जानकारी शेयर कर रहा हूं.
सांप और नेवले की लड़ाई मे अक्सर देखा जाता है कि नेवला सांप को मार देता है. दोनोंकी लड़ाई में कभी सांप का पलड़ा भारी होता है तो कभी नेवले का, मगर लड़ाई के दौरान दोनों ही लहू लुहान हो जाते है.
सांप नेवले को डंस देता है मगर नेवले के पास उसके बचाव के लिये विशेष एसिट्लोक्लिन रिफ्लेक्स होते हैं जो सांप के जहर, जिसमें न्यूरोटाक्सिन होता है, जो सांप के जहर के लिए प्रति रक्षा का काम करता है. और उस पर जहर का असर नहीं होने देता है.
माना जाता है कि दोनों के बिच धमासान लड़ाई के बाद
ज्यादातर नेवले खुद ही मर जाते हैं क्योंकि सांप के जहर का असर उन पर कुछ समय के बाद होता है. पर ऐसा बहुत ही कम मामलो मे पाया जाता है.
वेसे सांप फुर्तीला होता है, मगर नेवला उससे भी अधिक चपलता और फुर्ती से सांप के साथ लड़ता है. नेवला पहाड़ी इलाको में ज्यादातर पाये जाते है लेकिन यह जंगलों और मैदानो में भी अक्सर मिल जाते है.
सबसे छोटा नेवला 10 इंच लम्बा होता है जिसे बोना नेवला भी कहा जाता है. इसका वजन 300 ग्राम तक होता है. सबसे बड़े आकर का नेवला 30 इंच के आसपास होता है जिसे सफेद पूँछ वाला नेवला भी कहा जाता है. इस नेवले का वजन 5 किलो तक होता है.
नेवले की 33 प्रजाति पूरे विश्व मे पायी जाती है. यह एशिया, अफ्रीका, यूरोप जैसे महाद्वीपो पर मिलती है. नेवला बिल में निवास करते है, ये बिल किसी अन्य जानवर के होते है. नेवला खुद कभी कभार ही बिल बनाता है. नेवला की एक लम्बी पूँछ होती है. इसका शरीर लम्बा होता है. इसके चार पैर होते है , जो छोटे होते है. इनका रंग अलग अलग होता है. नेवला के शरीर पर भूरे रंग की फर होती है.
नेवला मांस खाने वाला प्राणी है. इनका प्रिय भोजन पक्षी, चूहा, मेंढक, अंडे होते है. कभी कभी सांप को भी यह शिकार करके, उसको मारकर खा जाता है. नेवला अंडों को पत्थर पर मारकर तोड़ता है.और अंडों को तोड़कर खाता है.
कुछ नेवले अकेले भी रहते है और कुछ झुंड में भी पाये जाते है. इनके झुंड को पैक्स कहते है. एक झुंड में करीबन 50 नेवले होते है.
नेवला मादा को सहवास के लिये आकर्षित करने के लिये गिगलिंग ध्वनि उत्पन्न करता है जिसका अर्थ होता है कि वो सहवास के लिए तैयार है.
मादा नेवला एक बार मे 4 बच्चो को जन्म देती है. बच्चे जन्म के समय अंधे होते है. नेवला 32 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है.
नेवला बेहद फुर्तीला और तेज शिकारी जीव है. यह अपनी फुर्ती से सांप को भी मात दे सकता है. सांप का जहर इस पर असर नही करता है लेकिन अगर सांप नेवले को कई बार डंस मारता है तब नेवले की मौत हो जाती है.
नेवले अपने तेज पंजो से अपने बच्चो की रक्षा करते है. इनके पँजे बहुत तेज होते है. नेवला अपने पंजे को छिपा नही सकते है. आम तौर पर एक दिन में लगभग 50 ग्राम भोजन करता है.
नेवला अपने खुराक मे किसी भी पक्षी के अंडे खाता है. मेढक नेवला की पसंदीदा भोजन है. जो उसे बारिस के समय आसानीसे मील जाते है. जो नेवला नदी किनारे रहता है वो मछली को भी खा जाता है.
इसके अलावा नेवले छोटे मोटे कीड़े, चूहें , खरगोश आदि खाता है तथा शेर या बिल्ली द्वारा मारे गए जानवरों के खून को पीता हैं.
अंत मे एक वफादार नेवले की कहानी से आजकी पोस्ट का समापन करुंगा.
” मूर्ख ब्राह्मणी का प्रायश्चित “
एक गांव मे निसंतान ब्राह्मण ब्राह्मणी रहते थे. उन्होंने मन बहलाने के लिये नेवला पाल लिया था. कुछ दिन बाद ब्राह्मणी के घर एक बेटे का जन्म हुआ. ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा कि अब हमारी संतान हो गई है, इसलिए नेवले को घर से बहार निकाल दो. कहीं ऐसा न हो कि नेवला बच्चे का कुछ नुकसान कर दे. मगर ब्राह्मणी ने ब्राह्मण की बात बिलकुल मानी नहीं.
एक दिन ब्राह्मणी कुंए पर पानी भरने गई. बच्चा पालने में सो रहा था और नेवला पालने के पास बैठा था. तब कहींसे एक सांप आ गया. वह बच्चे को काटने दौड़ा तो नेवले ने उसे झपटकर उसके टुकड़े टुकड़े कर दिये.
ब्राह्मीणी जब पानी घर आयी तो उसने खून से रंगे नेवले के मुंह को देखा. वो समजी नेवले ने बच्चे को मार दीया है. अतः उसने नेवले को पिट पिट कर मार डाला, और रोती हुई घर मे गई. उसने देखा की बच्चा बिस्तर पर खेल रहा है और सांप वहां मरा पड़ा हुआ है. वो सब समज गई और अपनी भूल पर पछताने लगी. और प्रायश्चित करने लगी कि अगर मैंने गुस्से पर काबू पाकर पहले घटना के बारे में जान लिया होता तो पुत्र की जान बचाने वाले नेवले को कभी नहीं मारती.
—–====शिवसर्जन ====——