अवधूत ” दादा गुरु ” भारत के एक आध्यात्मिक गुरु हैं. दादा गुरु एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु हैं, जो पर्यावरण की रक्षा और नदियों के प्रति प्रेम के लिए जाने जाते हैं. उनकी निराहार साधना और नर्मदा नदी के प्रति श्रद्धा ने उन्हें एक खास पहचान दी है.
गुरूजी पिछले कई वर्षों से केवल नर्मदा नदी के जल पर ही जीवन यापन कर रहे हैं और उनकी इस साधना ने विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. दादा गुरु जी का मुख्य मिशन पर्यावरण और नदियों की रक्षा करना है. वे नदियों के प्रदूषण और विनाश के खिलाफ आवाज उठाते हैं और लोगों को प्रकृति के महत्व के बारे में जागरूक करते हैं.
दादा गुरु नर्मदा नदी के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं और इसे अपनी जीवन शक्ति मानते हैं. वे हर साल कुछ महीने नर्मदा परिक्रमा में बिताते हैं और नदी की पूजा करते हैं. अवधूत दादा गुरु रोजाना सत्संग और सत्संग संवाद करते हैं, जिसमें वे लोगों को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय ज्ञान देते हैं. दादा गुरु ने नर्मदा मिशन नामक एक अभियान शुरू किया है, जिसके माध्यम से वे नर्मदा नदी के संरक्षण और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का प्रयास करते हैं.
अवधूत दादा गुरु, जिन्हें अवधूत शिवानंद के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु हैं. उनका जन्म 26 मार्च 1955 को दिल्ली में हुआ था और उनका पालन-पोषण राजस्थान में हुआ था. महज 8 वर्ष की उम्र में, वे हिमालयन योगी 108 स्वामी जगन्नाथ से मिले, जिन्होंने दादा गुरु को आध्यात्मिक पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया.
108 स्वामी जगन्नाथ से प्रेरित होकर, अवधूत शिवानंद ने ध्यान और साधना के लिए भारत में कई पवित्र स्थानोंका दौरा किया. उन्होंने दुनिया भर में आध्यात्मिकता और ध्यान को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. 1990 से, उन्होंने शिवयोग और अद्वैत श्री विद्या साधना पर व्याख्यान और कार्यशालाएं आयोजित करना शुरू किया. दादा गुरु गैर-लाभकारी संगठन शिवयोग के संस्थापक हैं. अनुयायियों के बीच, वे ‘बाबाजी’ नाम से प्रसिद्ध हैं.
1995 में उन्होंने शिवयोग फाउंडेशन की स्थापना की. उनका पहला शिवयोग आश्रम दिल्ली में बनाया गया था जहां उन्होंने ध्यान-साधना सिखाना शुरू किया. आज 3 शिवयोग आश्रम क्रमशः दिल्ली लखनऊ और कर्जत में हैं, और शिवयोग पाठ्यक्रम भारत में 100 से अधिक स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं. वर्ष 2000 से लगभग 30 देशों में शिवयोग कार्यक्रम पूरी दुनिया भर में आयोजित किए जाते हैं. सितंबर 2016 में, डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी डी पाटिल ने आधुनिक आध्यात्मिक विज्ञान में योगदान के लिए शिवानन्द जी को डॉक्टर एम्रिटस की मानद उपाधि प्रदान की हैं.
नर्मदा मिशन के संस्थापक एवं प्रकृति उपासक समर्थ सद्गुरु दादा गुरु जिन्होंने 1000 दिन से अधिक समय से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया हैं. वे सिर्फ़ और सिर्फ़ नर्मदा जल ग्रहण कर ही अपना जीवन यापन कर रहे है. समर्थ सद्गुरु दादा गुरु से जब पूछा गया की आपका ये महाव्रत कब तक चलेगा ? तो इसके जवाब में उन्होंने कहा की “ ये तो अखंड व्रत है. जब तक समाज माँ नर्मदा को बचाने के लिए जगरूक नहीं होता, तब तक मैं इसी तरह अखंड व्रत पर रहूँगा.
मैं बताना चाहता हूँ कि नर्मदा का जल इतना अच्छा एवं स्वास्थवर्धक है कि सिर्फ़ उसे पीकर भी हम जीवित रह सकते है”. समर्थ सद्गुरु दादा गुरु की इस साधना एवं महाव्रत को गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स ने विश्व कीर्तिमान का दर्जा देते हुए “First to Observe 1000 Days Fast for Social Cause” के शीर्षक के साथ अपनी रिकॉर्ड बुक में दर्ज किया हैं.
ता : 17 अक्टूबर 2020 से मां नर्मदा औऱ प्रकृति पर्यावरण की रक्षा, सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए सन्देश देने के उद्देश्य से सिर्फ नर्मदा जी का अमृततुल्य जल को ग्रहण करने वाले दादागुरु ने इन दिनों में माँ नर्मदा की जीवंत समर्थता और जीवन शक्ति को देश दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है. वे हमेशा कहते हैं “नर्मदा का पथ ही मेरा मठ है, और रास्ते में पड़ने वाले घर, गांव और नगर ही देवालय.” ऐसे हैं, अवधूत दादा गुरु, जिन्होंने राष्ट्र आराधना का मार्ग प्रशस्त किया है
नर्मदा परिक्रमा अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक की है, जिसे पूरा करने में लगभग तीन साल, तीन महीने और 13 दिन लगते हैं. नर्मदा परिक्रमा एकमात्र ऐसी परिक्रमा है, जिसमें पैदल चलना भी साधना है.
महायोगी अवधूत दादा गुरु का मानना है कि “मध्य प्रदेश में बहने वाली नर्मदा नदी का पानी इतना चमत्कारी है कि वह आपके शरीर में आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने के लिए सक्षम है. लोग इस नर्मदा जल के चमत्कार को समझ नहीं पा रहे हैं. लेकिन जल्द ही दुनिया इसके
बारे में जान जाएगी.”
दादा गुरु मध्य प्रदेश के 20 जिलों में लगातार सत्संग संवाद और जन जागरण का अभियान चला रहे हैं. दादा गुरु बताते हैं कि “3 बार प्राण वायु के आधार पर नर्मदा माता की परिक्रमा की है. सतपुड़ा विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में बहने वाली असाधारण नर्मदा नदी के रूप में मौजूद जलधारा में चमत्कारी तत्व हैं. जिनकी उपासना और सिद्धि की बदौलत सिर्फ दिन में 1-2 गिलास पानी पीकर 40 किलोमीटर तक पैदल नर्मदा परिक्रमा कर लेते हैं.”
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